सऊदी अरब में शिया मस्जिद में आत्मघाती बम विस्फोट, 4 लोगों की मौत, 18 घायल                                                 पाक में मौजूद आतंकियों के सुरक्षित पनाहगाह समस्या पैदा कर रहे: अमेव्यापारी नेता मिले मंत्री गोप जी सेरिकी जनरल                                            पूर्वी रूस में 7.0 तीव्रता का भूकंप, सुनामी का खतरा नहीं

टोना-टोटका जीवन में दिला सकते हैं सफलता! मात्र एक अंधविश्वास या आस्था

नई दिल्ली. दुनिया में जो दिखता है जरूरी नहीं वह वैसा ही हो। कुछ चीज़ें के प्रति किसी ना किसी कारणवश हमेशा के लिए एक गलत नज़रिया कायम हो जाता है। कुछ ऐसा ही हश्र हुआ है ‘टोटके’के साथ। विभिन्न वस्तुओं का इस्तेमाल करके जीवन में अलग-अलग लाभ पाने के लिए लोग टोना-टोटका करते हैं।महान तांत्रिकों द्वारा तंत्रों के विस्तृत ज्ञान की सहायता से बड़े स्तर पर टोने-टोटके किए जाते हैं। लोग इनका अपने स्वार्थ के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। अमूमन लोगों के मन में टोने-टोटके को लेकर गलत अवधारणा बनी रहती है। लेकिन मूल रूप से इसकी परिभाषा क्या है, यह बहुत कम लोग जानते हैं। दरअसल टोना या टोटका तंत्र विज्ञान का पूर्ण हिस

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पूजा अर्चना के साथ अर्धकुंभ शुरू, देश-विदेश से सात करोड़ श्रद्धालु पहुंचने की उम्मीद

देहरादून. हरिद्वार में शुक्रवार को विधिवत पूजा अर्चना के साथ अर्धकुंभ की शुरुआत हो गयी। हालांकि, चार माह चलने वाले इस अर्धकुंभ का पहला स्नान 14 जनवरी मकर संक्रांति को होगा। अर्धकुंभ मेले के पुलिस उपमहानिरीक्षक जी एस मर्तोलिया ने बताया कि इस मौके पर दोपहर हर की पौडी स्थित ब्रहकुंड में गंगा आरती और गंगा पूजन किया गया तथा अर्धकुंभ मेले के सकुशल आयोजन की प्रार्थना की गयी।पूजा के दौरान मर्तोलिया के अलावा अर्धकुंभ मेलाधिकारी एसए मुरूगेशन तथा मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी पुरूषोत्तम शर्मा मौजूद रहे। अप्रैल तक चलने वाले अर्धकुंभ में 14 अप्रैल को होने वाले मुख्य स्नान सहित 10 स्नान हो&

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बाजीराव मस्तानी के महल में भटकती आत्मा पुकारती है 'बचाओ'

मराठा साम्राज्य को बुलंद‌ियों पर ले जाने वाले बाजीराव ने 1746 ई. में एक महल का न‌िर्माण करवाया जो शन‌िवार वाड़ा के नाम से जाना जाता है। यह महल पुणे में आज भी मौजूद है। 1818 तक यह पेशावाओं के अध‌िकार में रहा। 1828 ई. में इस महल में आग लगी और महल का बड़ा ह‌िस्सा आग की चपेट में आ गया।यह आग कैसे लगी यह अपने आप में अब तक एक सवाल बना हुआ है। लेक‌िन बात यहीं तक नहीं रुकती है। स्‍थानीय लोग कहते हैं क‌ि इस महल से अब भी अमावस की रात एक दर्द भरी आवाज आती है जो बचाओ-बचाओ पुकारती है। यह आवाज उस सख्स क‌ि है ज‌िसकी हत्या इस महल में का दी गई थी। कहते हैं हत्या के बाद उसके शव को नदी में बहा द‌िया गया था।ऐसी मान्यता है क‌ि बाजीराव के बाद इस महल मे

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चावल के कुछ दानें और थोड़ा मंत्र जप काफी है भगवान के करीब पहुंचने के ल‌िए

शुरु में दस मिनट का अभ्यास काफी है। इस अभ्यास में चार गतिविधियां शामिल हैं। दिन के समय थोड़ा सा वक्त और अभ्यास के लिए नियमित कोशिश की जा सके तो अभ्यासियों को तैयार किया जा सकता है। कार्यक्रम अपनी दिनचर्या के हिसाब से बनाएं। इस अभ्यास को पंद्रह वर्ष की उम्र के आसपास शुरू किया जा सकता है। बाद में इसे दस मिनट से आधा तक बढ़ा सकते हैं।
आध्यात्मिक कसरत में चार गतिविधियां शामिल हैं:पूजा, आत्मनिरीक्षण, कथन �एवं अध्ययन। पूजा में अपने इष्ट देवता के मंत्र का जप या देवता के नौ या अधिक नामों का जाप करना। मूर्ति या तस्वीर को चावल के दानें अर्पित करना। श्रद्धा और कृतज्ञता की इस दूसरे चरण में शामिल है अपनी आंखे बंद क

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हर व्यक्त‌ि इन बातों को समझे तो व‌िश्व में शांत‌ि और सद्भाव संभव है

21 स‌ितंबर को व‌‌िश्व शांत‌ि द‌िवस के रुप में मनाया जाता है क्योंक‌ि मानव के व‌िकास और उन्नत‌ि के ल‌िए शांत‌ि सबसे जरुरी तत्व है। लेक‌‌िन साल में स‌‌िर्फ एक द‌िन को शांत‌ि द‌िवस के रुप में मनाने भर से यह उद्देश्य पूरा नहीं होता है।
समाज में द‌िन ब द‌िन असंतोष, व‌िषमता और द्वेष की भावना बढ़ती जा रही है और यह शांत‌ि को भंग करने काम कर रही है। आये द‌िन व‌िद्रोही गुट, आतंकी गुटों का जन्म हो रहा है और व‌िश्व के समाने में शांत‌ि एक चुनौती बनती जा रही है।
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य का कहना है क‌ि दुन‌िया में शांत‌ि स्‍थापना के ल‌िए अगल से कुछ करने की जरुरत नहीं है हमे बस अपने अंदर झाकने की जरुरत भर है। वास्तव में दुनì

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शरीर से आत्मा न‌िकलते समय यह काम जरूर करना चाह‌िए

दुनिया में हर जगह लोग शांतिपूर्वक मरने की बात करते हैं। मृत्यु की बेचैनी या अशांति को दूर करने के लिए एक जो आसान सा काम आप कर सकते हैं वह क्या है बता रहे हैं सद्गरू जग्गी वासुदेव। जो व्यक्त‌ि मृत्यु के करीब पहुंच गया है। उस व्यक्ति के पास लगातार पूरे दिन रात एक दीया जला कर रखें। घी का दीपक बेहतर होगा। इसके पीछे एक बड़ा कारण है। घी के दीपक से एक खास आभामंडल बनता है, जिससे मृत्यु की अस्थिरता और बेचैनी कुछ हद तक कम की जा सकती है। एक उपाय और कर क‌िया जा सकता है। धीमे स्वर में ‘ब्रह्मानंद स्वरूप’ जैसा कोई मंत्र सीडी पर चला दें। इस तरह की कोई ऊर्जावान ध्वनि भी अशांतिपूर्ण मृत्यु की संभावना को टाल सकती है। दिय

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शरीर से आत्मा न‌िकलते समय यह काम जरूर करना चाह‌िए

दुनिया में हर जगह लोग शांतिपूर्वक मरने की बात करते हैं। मृत्यु की बेचैनी या अशांति को दूर करने के लिए एक जो आसान सा काम आप कर सकते हैं वह क्या है बता रहे हैं सद्गरू जग्गी वासुदेव। जो व्यक्त‌ि मृत्यु के करीब पहुंच गया है। उस व्यक्ति के पास लगातार पूरे दिन रात एक दीया जला कर रखें। घी का दीपक बेहतर होगा। इसके पीछे एक बड़ा कारण है। घी के दीपक से एक खास आभामंडल बनता है, जिससे मृत्यु की अस्थिरता और बेचैनी कुछ हद तक कम की जा सकती है। एक उपाय और कर क‌िया जा सकता है। धीमे स्वर में ‘ब्रह्मानंद स्वरूप’ जैसा कोई मंत्र सीडी पर चला दें। इस तरह की कोई ऊर्जावान ध्वनि भी अशांतिपूर्ण मृत्यु की संभावना को टाल सकती है। दिय

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इस एकादशी से म‌िलता है मोक्ष, देवता भी रखते हैं व्रत

कार्त‌िक महीने की शुक्लपक्ष की एकादशी का बड़ा ही महत्व है। कहते हैं इस एकादशी के द‌िन व्रत पूजा करने वाले के कई जन्मों के पाप कट जाते हैं और व्यक्त‌ि उत्तम लोक में जाने का अध‌िकारी बन जाता है।
इसल‌िए परलोक में उत्तम गत‌ि की इच्छा रखने वाले इस द‌िन भगवान व‌िष्‍णु के ल‌िए व्रत रखते हैं। इस एकादशी को लेकर ऐसी मान्यता भी है क‌ि इसद‌िन देवतागण भी भगवान व‌िष्‍णु के पास पहुंचकर उनके दर्शन का लाभ पाते हैं और व्रत पूजन करते हैं। आइये जानें इस एकादशी का क्या महत्व है और इसकी क्या कथा है। कार्त‌‌िक शुक्ल एकादशी को शास्‍त्रों में देव उठानी एकादशी और देवप्रबोधनी एकादशी के नाम से बताया गया है। इसका कारण है क‌ि इ

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मलमास कैसे बना सभी का पूजनीय?


जिस परम धाम गोलोक को पाने के लिए ऋषि तपस्या करते हैं वही दुर्लभ पद पुरुषोत्तम मास में स्नान, पूजन, अनुष्ठान व दान करने वाले को सरलता से प्राप्त हो जाते हैं।  श्री कृष्ण कहते हैं, पुरुषोत्तम मास को पूजने वालों के दु:ख-दरिद्रता का नाश होगा। यह मेरे समान ही मनुष्यों को मोक्ष प्रदान करेगा। जो कोई इच्छा रहित या इच्छा वाला इसे पूजेगा वह मुझ को प्राप्त होगा। सब साधनों में श्रेष्ठ तथा सब काम व अर्थ को देने वाला यह पुरुषोत्तम मास स्वाध्याय योग्य होगा। इस मास में किया गया पुण्य कोटि गुणा होगा। जो भी मनुष्य मेरे प्रिय मलमास का तिरस्कार करेंगे और जो धर्म का आचरण नहीं करेंगे, वे सदैव नरक के गामी होंगे। इस प्रक

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संसार ने ठुकराया भगवान ने अपनाया और बना दिया उसे अपने समान

इस साल अधिकममास) पड़ने के कारण लगभग सभी व्रत और त्योहार आम सालों की अपेक्षा कुछ जल्दी पड़ेंगे। 2015 में अधिकमास अर्थात पुरुषोत्तम मास के कारण दो आषाढ़ होंगे यह 17 जून 2015 से प्राम्भ होगा। प्रत्येक राशि, नक्षत्र, करण व चैत्रादि बारह मासों सभी के स्वामी हैं परन्तु मलमास का कोई स्वामी नही है इसलिए देव कार्य, शुभ कार्य एवं पितृ कार्य इस मास में वर्जित माने गए हैं।
इससे दुखी होकर स्वयं मलमास(अधिक मास) बहुत नाराज व उदास रहता था, इसी कारण सभी ओर उसकी निंदा होने लगी। मलमास को सभी ने असहाय, निन्दक, अपूज्य तथा संक्रांति से वर्जित कहकर  लज्जित किया। अत: लोक-भर्त्सना से दुखी होकर मल मास भगवान विष्णु के पास वैकुण्ठ लोक मे&#

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आपकी सभी समस्याओं का हल समाया है इस एक कर्म में

पुरुषोत्तम मास में नियमावली का पालन करने, भगवान का विधि-विधान से पूजन करने पर वह बहुत प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने वाला भू-लोक पर समस्त प्रकार के आनंद भोगकर मृत्यु के पश्चात भगवान के दिव्य गोलोक में वास करता है।
सनातन धर्म के अनुसार, “दान-धर्मत परो धर्मो भत्नम नेहा विद्धते”
अथार्त- दान धर्म से बड़ा न तो कोई पुण्य है न ही कोई धर्म। 
भगवान के प्रिय अधिक मास में दान का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। जो पैसा किसी को दुख तकलीफ देकर कमाया जाए वो कभी फलीभूत नहीं होता। जो पैसा दूसरों के काम आए वो बहुत सुख देता है। दान करके जब आप दूसरों को खुशी देते हैं, तो बदले में आपको खुशी मिलती है। खुद की चीज देने के बावजूद आप&#

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लक्ष्मी हैं आपसे नाराज तो ये उपाय करेंगे समाधान

भगवान शंकर ने मानव कल्याण के लिए वास्तु विज्ञान को उत्पन्न किया। इसी वास्तु विज्ञान के अनुसार कुछ ऐसी बातें हैं जिनको ध्यान में रखने से अगर लक्ष्मी आप से नाराज होंगी तो कुछ उपाय करने से वे शीघ्र मान जाएंगी और आपको जॉब एवं कारोबार में प्रगती के साथ साथ धन लाभ भी होगा।
* बाथरुम और टॉयलेट के दरवाजों को खुला न छोड़ें हमेशा बंद करके रखें।
* कैक्टस जैसे कांटे वाले, दूध निकलने वाले और जहरीले पेड़ पौधे घर एवं कार्य स्थान पर नहीं लगाने चाहिए इससे धन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं।
* आपकी दुकानदारी में मंदी छाई हुई है तो दुकान की दक्षिणी दीवार की मुंडेर पर ईंटों की चिनाई करवाकर उसे ऊंचा करवा &

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भूमि, भवन और वाहन की इच्छा पूर्ण करेगा ये मंत्र

सुशील नाम का एक निर्धन ब्राह्मण रहता था। देवताओं और अतिथियों की पूजा करने के पश्चात अपने आश्रितजनों को खिला कर ही वह स्वयं भोजन ग्रहण करता था। इतना दुखी होने पर भी वह दूसरों की सहायता को सदा तत्पर रहता था। एक बार उसके घर के निकट सत्यव्रत नामक एक तेजस्वी ऋषि आकर ठहरे। मंत्रों और विद्याओं का उनके समान ज्ञाता आसपास दूसरा कोई नहीं था। सुशील ने सत्यव्रत को प्रणाम कर कहा, ऋषिवर! आप अति दयालु तथा अनेक शास्त्रों और मंत्रों के ज्ञाता हैं। मैं एक निर्धन व दरिद्र व्यक्ति हूं। मेरी दरिद्रता किस प्रकार समाप्त हो सकती है? धनाभाव के कारण मैं अपने कुटुम्ब को सुख नहीं दे पा रहा। मुझे उतना ही धन चाहिए जिससे मे

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जीवन क्या है?

विलियम शेक्सपियर ने कहा था कि जिंदगी एक रंगमंच है और हम लोग इस रंगमंच के कलाकार, सभी लोग जीवन को अपने-अपने नजरिए से देखते हैं। कोई कहता है जीवन एक खेल  है। कोई कहता है जीवन ईश्वर का दिया हुआ उपहार है, कोई कहता है जीवन एक यात्रा है, कोई कहता है जीवन एक दौड़ है और बहुत कुछ।
जीवन क्या है?

* मनुष्य का जीवन एक प्रकार का खेल है और मनुष्य इस खेल का मुख्य खिलाड़ी। 

* यह खेल मनुष्य को हर पल खेलना पड़ता है। 

* इस खेल का नाम है विचारों का खेल। 

* इस खेल में मनुष्य को दुश्मनों से बच कर रहना पड़ता है।  

* मनुष्य अपने दुश्मनों से तब तक नहीं बच सकता, जब तक मनुष्य के मित्र उसके साथ नहीं हैं। 

* मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र विचार है 

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विनाश के मध्य भी खड़ा है पशुपतिनाथ मंदिर

विगत दिनों नेपाल में आए भूकम्प में उतनी ही तबाही मची थी जितनी जून 2013 में उत्तराखंड में बाढ़ से मची थी। जैसे केदारनाथ मंदिर अपने आसपास के सब भवन ध्वस्त होने के बाद भी खड़ा रहा था उसी तरह पशुपतिनाथ मंदिर भी उन ध्वस्त भवनों के बीचों-बीच मामूली क्षति के खड़ा है। केदारनाथ तथा पशुपतिनाथ दोनों भगवान शिव से संबंधित प्रमुख मंदिर हैं जो पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित हैं। भगवान शिव इस ब्रह्मांड के रचयिता भी हैं और संहारक भी। धार्मिक विशेषज्ञ इस चमत्कारिक संयोग पर आश्चर्यचकित हैं। बोरीवली के आध्यात्मिक गुरु मुकेश त्रिवेदी का कहना है कि केदारनाथ तथा पशुपतिनाथ इतनी सदियों बाद तक भी इसलिए खड़े हैं क्य

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केदारनाथ: जहां मौत भी देती है उपहार

हिंदू धर्म में बहुत से तीर्थ स्थल हैं जिनकी यात्रा का अपना-अपना महत्व है लेकिन जब तक चार धाम यात्रा न कर लें तब तक यात्रा अपूर्ण ही रहती है। यह चार धाम है:- बद्रीनाथ, द्वारिकाधीश, जगन्नाथ और रामेश्वरम। मान्यता है की श्री हरि विष्णु बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, द्वारिकाधीश में वस्त्र पहनते हैं, जगन्नाथ में भोजन करते हैं और रामेश्वरम में विश्राम करते हैं। शास्त्रों के अनुसार बारह ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ में स्थापित ज्योतिर्लिंग सबसे ऊंचे स्थान पर है। धर्म शास्त्रों के अनुसार भविष्यवाणी की गई है की इस सारे क्षेत्र में जितने भी तीर्थ विद्यमान हैं वह सारे आने वाले समय में लुप्त हो जाएं&#

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नारदकुंड: स्नान करने से मरने के पश्चात मिलता है मोक्ष

शास्त्रों में उल्लेख के अनुसार ‘नार’ शब्द का अर्थ जल है। यह सबको जलदान, ज्ञानदान करने एवं तर्पण करने में निपुण होने की वजह से नारद कहलाए। सनकादिक ऋषियों के साथ भी नारद जी का उल्लेख आता है। भगवान सत्यनारायण की कथा में भी उनका उल्लेख है। नारद अनेक कलाओं में निपुण माने जाते हैं। यह वेदांतप्रिय, योगनिष्ठ, संगीत शास्त्री, औषधि ज्ञाता, शास्त्रों के आचार्य और भक्ति रस के प्रमुख माने जाते हैं। यह भागवत मार्ग प्रशस्त करने वाले दवॢष हैं। ‘पांचरात्र’ इनके द्वारा रचित प्रमुख ग्रंथ है। वैसे 25 हजार श्लोकों वाला प्रसिद्ध नारद पुराण भी इन्हीं के द्वारा रचा गया है। पुराणों में इन्हें भगवान के गुण गाने मे

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इस स्थल पर रावण को प्राप्त हुए थे भगवान शिव से दस सिर

जिला कांगड़ा के बैजनाथ में स्थित प्राचीन शिव मंदिर उत्तरी भारत का आदिकाल से एक तीर्थ स्थल माना जाता है। इस मंदिर में स्थित अर्धनारीश्वर शिवलिंग देश के विख्यात एवं प्राचीन ज्योती लिंग में से एक है। जिसका इतिहास लंकाधिपति रावण से जुड़ा है यूं तो वर्ष भर प्रदेश के देश-विदेश से हजारों की संख्या में पर्यटक इस प्राचीन मंदिर में विद्यमान प्राचीन शिवलिंग के दर्शन के साथ-साथ इस क्षेत्र की प्राकृतिक सौदर्य की छटा का भरपूर आनंद लेते है परन्तु शिवरात्रि एवं श्रवण मास में यह नगरी बम-बम भोले के उदघोष से शिवमयी बन जाती है , प्रदेश सरकार द्वारा इस मंदिर में कालातंर से मनाये जाने वाले शिवरात्री मेले के महत

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यहां भजन-साधन करने से मिलती है कृष्ण-प्रेम की सिद्घि

श्री नवद्वीप धाम की परिधि सोलह कोस है। इसका आकार अष्टदल कमल की तरह है। सीमन्त द्वीप, गोद्रुम द्वीप, मध्यद्वीप, कोल द्वीप ऋतु द्वीप, जह्र द्वीप, मोदद्रुम द्वीप और रूद्र द्वीप। ये आठ द्वीप कमल के अष्टदल हैं। इन सब के मध्य में स्थित अंतर्द्वीव कमल की कर्णिका है। इस अंतर्द्वीव के बीचाें बीच श्रीमायापुर स्थित है। नवद्वीप धाम में विशेषत: मायापुर में भजन-साधन करने से अत्यन्त शीघ्र ही कृष्ण-प्रेम की सिद्घि हाे जाती है। मायापुर के मध्य भाग में महा याेगपीठ रूप श्रीजगन्नाथ मिश्र जी का भवन (मंदिर) है। साैभाग्यशाली जीव इसी याेगपीठ में श्रीगाैराडगंदेव की नित्यलीला का दर्शन करते हैं। श्रीनवद्वीप धाम &

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वृक्ष पूजन से लाएं घर में सुख-समृद्धि और शांति

गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं,\" मैं वृक्षों में पीपल हूं। सूर्योदय होने पर पीपल पर दरिद्रता निवास करती हैं और सूर्योदय के उपरांत लक्ष्मी जी। मान्यता है की जिस घर में पीपल का वृक्ष होता है उस घर में लक्ष्मी सदा निवास करती हैं। जैसे-जैसे पीपल में बढ़ौतरी होती है वैसे-वैसे घर में सुख-सौभाग्य बढ़ता है। यदि आपके घर में पीपल वृक्ष नहीं है तो मंदिर अथवा किसी चौरस्ते पर जाकर प्रतिदिन विधि-विधान से पीपल का पूजन करें।गीता में पीपल की उपमा शरीर से की गई है। \'अश्वत्थम् प्राहुख्‍ययम्\' अर्थात अश्वत्‍थ (पीपल) का काटना शरीर-घात के समान है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी पीपल प्राणवायु का केंद्र है। यानी पीपल का वृक्

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आज भी साक्षात विष्णु के सुदर्शन चक्र के होते हैं दर्शन

मान्यता है कि जब जब पृथ्वी पर कोई संकट आता है तो भगवान अवतार लेकर उस संकट को दूर करते हैं। भगवान विष्णु ने अनेकों बार पृथ्वी पर अवतार लिया है। पद्म पुराण के उत्तरखण्ड में वर्णन है कि भगवान श्री विष्णु ही परमार्थ तत्त्व हैं। वे ही ब्रह्मा और शिव सहित समस्त सृष्टि के आदि कारण हैं। वे ही नारायण, वासुदेव, परमात्मा, अच्युत, कृष्ण, शाश्वत, शिव, ईश्वर तथा हिरण्यगर्भ आदि अनेक नामों से पुकारे जाते हैं। नर अर्थात जीवों के समुदाय को नार कहते हैं। प्रेम सुखसागर धर्मशास्त्र के अनुसार भगवान विष्णु के 24 अवतार हुए हैं। हम अपने पाठकों को इस लेख के माध्यम से भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से पहले अवतार श्री सनकादि मुनि क

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जब शनि देव को बनना पड़ा स्त्री

गुजरात में भावनगर के सारंगपुर में हनुमान जी का एक अति प्राचीन मंदिर है जो   कष्टभंजन हनुमानजी के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की विशेषता यह है की इस मंदिर में हनुमान जी के पैरों में स्त्री रूप में शनि देव बैठे है। सभी जानते हैं कि हनुमानजी स्त्रियों के प्रति विशेष आदर और सम्मान का भाव रखते हैं। ऐसे में उनके चरणों में किसी स्त्री का होना आश्यर्च की बात है लेकिन इसका सम्बन्ध एक पौराणिक कथा से है जिसमें बताया गया है कि आखिर क्यों शनिदेव को स्त्री का रूप धारण कर हनुमान जी के चरणों में आना पड़ा।  शास्त्रों में हनुमान जी और शनि देव से जुड़े अनेकों प्रसंग है जो बताते है की कैसे समय-समय पर हनुमान जी ने शनिदेव क

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2015 के विशेष शुभ मुहूर्त


दो आषाढ़ का साल 13 माह का होगा हिन्दू नव वर्ष सामान्यत: अंग्रेजी और हिन्दी महिनों में 12 माह होते है लेकिन विक्रम संवत 2072 अधिकमास है। ज्योतिषचार्यों के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष के उपरांत अधिकमास का आगाज होता है। जिसे पुरूषोतम मास के नाम से जाना जाता है। इसमें दान, पुण्य, धार्मिक पूजा- पाठ आदि सद्कार्य तो किए जा सकते हैं परंतु शुभ काम करना वर्जित होता है।2015 के विशेष शुभ मुहूर्त जनवरी- 17, 24, 29, 31 फरवरी- 10, 15 मार्च- 9,10,11,13 अप्रेल- 21, 27, 28, 29, 30 मई- 5 से 2 जून तक ज्येष्ठ महीनाजून- 3 जूलाई- 25 अक्टूबर- 31 नवंबर- 26, 27दिसंबर- 7, 8, 13,14



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शिक्षा ग्रहण करने के लिए हनुमान जी को माता अंजनादेवी ने किसके पास भेजा


भगवान हनुमान जिनसे सभी बल, बुद्धि,बिद्या देने की कामना करते की शिक्षा के लिए उनकी माता कितनी चिंतित थी ये तो उनका इतिहास पढ़ने से ही पता चलता है। कई एेसी पौराणिक कथाएं है जिनसे हम उनके बारे में पढ़ सकते हैं। जैसेमाता अखिल ब्रह्माण्ड की अदम्य शक्तिस्वरूपा होती है। समग्र सृष्टि का स्वरूप माता की गोद में ही अंकुरित, पल्लवित, पुष्पित एवं विकसित होता है। विश्व का उज्ज्वल भविष्य माता के स्नेहांचल में ही फूलता-फलता है। यदि कहा जाए कि निखिल संसार की सर्जना-शक्ति माता है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। बालक जन्म से पूर्व गर्भ में ही माता से संस्कार ग्रहण करने लग जाता है और जन्म के बाद वह माता के संस्क&#

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यहां शतरंज की विशाल गोटिया खेलते थे भीम और घटोत्कच

भारत के पूर्वोत्तर में स्थित राज्य नागालैंड का एक शहर दीमापुर जिसको कभी हिडिंबापुर के नाम से जाना जाता था और शहर पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है।इस जगह महाभारत काल में हिडिंबा राक्षस और उसकी बहन हिडिंबा रहा करते थे। यही पर हिडिंबा ने भीम से विवाह किया था। यहां बहुलता में रहनेवाली डिमाशा जनजाति खुद को भीम की पत्नी हिडिंबा का वंशज मानती है। यहां आज भी हिडिंबा का वाड़ा है, जहां राजवाड़ी में स्थित शतरंज की ऊंची-ऊंची गोटियां पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है।हिडिंबा और भीम का इतिहास: महाभारत की कथा के अनुसार वनवास काल में जब पांडवों का घर षडय़ंत्र के तहत जला दिया गया तो वे वहां से भागकर एक दूसरे वन म

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