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आपकी सभी समस्याओं का हल समाया है इस एक कर्म में

पुरुषोत्तम मास में नियमावली का पालन करने, भगवान का विधि-विधान से पूजन करने पर वह बहुत प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने वाला भू-लोक पर समस्त प्रकार के आनंद भोगकर मृत्यु के पश्चात भगवान के दिव्य गोलोक में वास करता है।
सनातन धर्म के अनुसार, “दान-धर्मत परो धर्मो भत्नम नेहा विद्धते”
अथार्त- दान धर्म से बड़ा न तो कोई पुण्य है न ही कोई धर्म। 
भगवान के प्रिय अधिक मास में दान का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। जो पैसा किसी को दुख तकलीफ देकर कमाया जाए वो कभी फलीभूत नहीं होता। जो पैसा दूसरों के काम आए वो बहुत सुख देता है। दान करके जब आप दूसरों को खुशी देते हैं, तो बदले में आपको खुशी मिलती है। खुद की चीज देने के बावजूद आपको खुशी होती है, क्योंकि आपने कुछ अच्छा किया है। 
दानेन भूतानि वशी भवन्ति
दानेन वैराण्यपि यान्ति नाशम् ।
परोऽपि बन्धुत्वभुपैति दानैर्
दानं हि सर्वेव्यसनानि हन्ति ॥
दान से सभी प्राणी वश में होते हैं, दान से वैर खत्म होता है, दान से शत्रु भी भाई बन जाता है और दान से ही सभी संकट दूर होते हैं ।
पुरुषोत्तम मास में किन चीजों का करें दान- 
* प्रतिपदा तिथि को घी चांदी के बरतन में डालकर दान करें।
* द्वितीया तिथि को कांसे के बरतन में सोना डालकर दान करें।
* तृतीया तिथि को चने या चने की दाल दान करें।
* चतुर्थी तिथि को खजूर का दान करें।
* पंचमी तिथि को गुड़ एवं तूर की दाल दान करें।
* षष्टी तिथि को अष्टगन्ध का दान करें।
* सप्तमी-अष्टमी तिथि को रक्त चंदन का दान करें।
* नवमी तिथि को केसर का दान करें।
* दशमी तिथि को कस्तुरी का दान करें।
* एकादशी तिथि को गोरोचन या गौलोचन का दान करें।
* द्वादशी तिथि को शंख का दान करें।
* त्रयोदशी तिथि को घंटाल या घंटी का दान करें।
* चतुर्दशी तिथि को मोती या मोती की माला का दान करें।
* पूर्णिमा तिथि को माणिक अथवा रत्नों का दान करें।

News Posted on: 18-06-2015
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