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कार की सस्ती बैटरी के लिए एआरएआई ने किया गठजोड़

देश में वाहन क्षेत्र के लिए शोध करने वाले संस्थान ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) ने यात्री कारों के लिए सस्ती बैटरी विकसित करने की खातिर विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से हाथ मिलाया है। इसमें उस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जो अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले वाहनों की बैटरी तैयार करने में की जाती है। एआरएआई की निदेशक रश्मि उर्धवाश्र्ये ने कहा, एआरएआई इलेक्ट्रिक वाहनों व हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल के लिए बैटरी का विकास व उसकी जांच करेगा और इसके बाद ऐसी बैटरी की लागत घटाने की खातिर बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तकनीक के हस्तांतरण की पेशकश करेगा। यह परियोजना के तहत एआरएआई व वीएसएससी का ध्यान भारतीय वाहन उद्योग के लिए इलेक्ट्रिक वाहनोंं व हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों की तकनीक विकसित करने पर होगा। इसे आयात के विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाया जाएगा और सरकार के मेक इन इंडिया के मिशन के तहत भी। विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के निदेशक के सिवन ने कहा, अंतरिक्ष के वाहनों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक का वाहन क्षेत्र की बैटरी में इस्तेमाल की अवधारणा पहले से ही सिद्ध है और अब एआरएआई के साथ गठजोड़ से इसकी जांच वाहनों में वास्तविक तौर पर इस्तेमाल की खातिर हो सकेगी। इसके तीसरे चरण के तहत यह तकनीक बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तब हस्तांतरित की जाएगी जब इसकी अनुपूरक तकनीक की अवधारणा व वॉल्यूम आदि से बैटरी की अफोर्डेबिलिटी तय होगी। आम जिंदगी में अंतरिक्ष की तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। एआरएआई की निदेशक ने कहा, विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर कामयाबी के साथ प्रयोगशाला में इस बात की जांच कर चुका है कि अंतरिक्ष के वाहनों के लिए बनाई गई बैटरी की तकनीक का इस्तेमाल वाहन क्षेत्र के लिए उपयुक्त है। एआरएआई वाहनों में इस तकनीक की जांच पर काम करेगा और एक साल के भीतर इसका प्रोटोटाइप पेश करेगा। इसके बाद उद्योग को ऐसी बैटरी बनाने के लिए के लिए आगे आना होगा ताकि वह वाहन विनिर्माताओं को इसकी आपूर्ति कर सके। इसके अलावा एआरएआई वाहनों व यात्रियोंं के लिए ऐसी बैटरी को सुरक्षित बनाने के लिए बैटरी प्रबंधन की व्यवस्था व थर्मल मैनेजमेंट विकसित करेगा। देश में इसके विनिर्माण से इसकी लागत आयातित बैटरी के मुकाबले 10वां हिस्सा होगी। अभी भारत चीन से बैटरी का आयात करता है।

News Posted on: 05-01-2016
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