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दिल्ली सरकार ने नर्सरी एडमिशन का मैनेजमेंट कोटा समाप्त किया

दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों में नर्सरी में नामांकन के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े तबके को छोड़कर प्रबंधन एवं अन्य सभी कोटे को रद्द कर दिया है और स्कूलों को चेतावनी दी है कि जो संस्थान आदेश का उल्लंघन करेंगे उन पर शिक्षा विभाग कार्रवाई करेगा। राज्य कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रबंधन कोटा को देश के शिक्षा क्षेत्र में सबसे बड़े घोटाले की जमीन करार देते हुए कहा कि उनकी सरकार इसे मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगी। सरकार ने स्कूलों द्वारा अपनी वेबसाइट पर सूचीबद्ध 62 मनमाने और भेदभावपूर्ण नियमों को रद्द कर दिया है। बहरहाल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 25 फीसदी कोटा बना रहेगा। राष्ट्रीय राजधानी में 2500 से ज्यादा निजी स्कूलों में नर्सरी कक्षाओं में नामांकन की प्रक्रिया के बीच यह निर्णय आया है।
केजरीवाल सरकार ने खत्म किया नर्सरी एडमिशन में स्कूलों का मैनेजमेंट कोटा दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों में नर्सरी में नामांकन के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े तबके को छोड़कर प्रबंधन एवं अन्य सभी कोटे को रद्द कर दिया है और स्कूलों को चेतावनी दीकेजरीवाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रबंधन कोटा क्या है? इसके तहत अगर किसी की अनुशंसा मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, न्यायाधीश, पुलिस आयुक्त, एसएचओ या आयकर विभाग का कोई अधिकारी करता है तो नामांकन मिल जाएगा। इसके तहत या तो अनुशंसा से नामांकन मिलता है या फिर सीटें बेची जाती है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन कोटा देश में सबसे बड़ा घोटाला है जिसे दिल्ली सरकार रद्द कर रही है। 
निजी स्कूलों में 75 फीसदी नामांकन सामान्य श्रेणी में होगा। ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अलावा कोई दूसरा कोटा नहीं होगा। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे संस्थानों के खिलाफ उनका अधिग्रहण करने सहित सभी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी। उन्होंने कहा कि अगर वे नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है या सरकार उनका अधिग्रहण कर सकती है। माफिया ने शिक्षा क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है और इसे व्यवसाय बना दिया है। सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। केजरीवाल के साथ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी मौजूद थे जो शिक्षा मंत्री भी हैं। केजरीवाल ने कहा कि नामांकन प्रक्रिया जनहितैषी और पारदर्शी बनाने के लिए यह निर्णय किया गया। 
दिल्ली में निजी स्कूलों के कोटे में प्रबंधन, भाई..बहन, एलुमनाई और कई अन्य आरक्षित वर्ग हैं। निर्णय में स्कूलों को अभिभावकों से यह घोषणा कराने से भी रोका गया है कि वे धूम्रपान करते हैं या नहीं शराब पीते हैं या नहीं या मांसाहारी भोजन करते हैं या नहीं। हाईकोर्ट ने आदेश में दिल्ली सरकार से कहा था कि नामांकन प्रक्रिया को इतना संकीर्ण नहीं किया जाए, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों को उनके संबंधित नियम तय करने और अपनी वेबसाइट पर लगाने की अनुमति दी। केजरीवाल ने कहा कि स्कूलों द्वारा रखे गए कुछ नियम �काफी स्तब्धकारी� थे और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन थे, जिसके तहत कानून के समक्ष सब समान है। केजरीवाल ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मुझे बताया कि अदालत ने नामांकन प्रक्रिया को संकीर्ण नहीं बनाने का निर्देश दिया है। मैंने उनसे कहा कि चिंतित नहीं हों। अदालत को बताइए कि मैंने ऐसा किया है। मैं अदालत को बताउंगा कि प्रबंधन कोटा सबसे बड़ा घोटाला है और इसे रोका जाना चाहिए। और अब कैबिनेट ने इसे अपनी मंजूरी दे दी है। केजरीवाल ने कहा कि स्कूलों के कुछ नियम कतई स्वीकार्य नहीं हैं। केजरीवाल ने कहा कि जिन बच्चों के अभिभावक मांसाहारी खाना खाते हैं, धूम्रपान करते हैं या शराब पीते हैं उन्हें नामांकन नहीं मिलेगा। 
जो अभिभावक संगीत और पेंटिंग जानते हैं उन्हें ज्यादा अंक मिलेंगे। नियम काफी मनमाने हैं, गलत और भेदभावकारी है। इसका मतलब क्या है? उन्होंने कहा कि आपके हाथ में एक हैंडल है और आप निर्णय करेंगे कि किसे नामांकन देना है। यह अस्वीकार्य है। विभिन्न स्कूलों में कोटा के उदाहरण को सूचीबद्ध करते हुए उन्होंने कहा कि एक स्कूल ने प्रबंधन कोटे के तहत 75 फीसदी सीट आरक्षित कर दीं और केवल 25 फीसदी सामान्य श्रेणी में बचीं।

News Posted on: 07-01-2016
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