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अकेले 1009 रन बनाने वाले प्रणव की राह नहीं थी आसान

मुम्बई। क्रिकेट जगत में 1009 रन का जादुई आंकड़ा छूने वाले 16 वर्षीय प्रणव धनावड़े की राह बेहद मुश्किल रही। प्रणव लिए क्रिकेट में कॅरियर बनाना काफी मुश्किल था, लेकिन उन्होंने सभी बाधाओं को पार करते हुए मंगलवार को इतिहास रच दिया। प्रणव� के माता-पिता बहुत ही गरीब परिवार से हैं और दोनों ही दिन-रात� मेहनत करते हैं। उनके माता पिता अपने पुत्र की परवरिश और शिक्षा में कोई कमी नहीं छोडऩा चाहते। उन्होंने अपने इकलौते पुत्र को इंग्लिश मीडियम से पढ़ाने का फैसला किया। प्रणव का कल्याण स्थित केसी गांधी स्कूल काफी महंगे और नामचीन विद्यालयों में से एक है। 10वीं कक्षा के छात्र प्रणव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने मां-बाप और कोचों को देते हुए भारतीय टीम में खेलने की इच्छा जाहिर की है। प्रणव के पिता ऑटो रिक्शा चालक है, जबकि मां कैटरिंग का कार्य करती है। सरकार ने प्रणव के आगे की पढ़ाई का खर्च उठाने की भी घोषणा की है।बेटे की मेहनत लाई रंगप्रणव के पिता प्रशांत धनावड़े ने बताया कि वह अपने बेटे के खेल और उसकी सफलता से बेहद खुश है। उन्होंने कहा कि प्रणव की 11 साल की मेहनत आखिर रंग लाई। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हुए कि प्रणव आगे चलकर एक बेहतरीन खिलाड़ी बनेंगे और देश की टीम में खेलेंगे। प्रणव के पिता कल्याण के रामबाग से लेकर चिकनघर तक करीब 20 सालों से ऑटो रिक्शा चला रहे हैं।हौसला बढ़ाने में लगी मांप्रणव की मां मोहिनी प्रशांत धनावड़े ने कहा कि बेटे का खेलना हमें हमेशा से ही अच्छा लगता है। प्रणव पर ईश्वर की कृपा है। हम आगे भी उसे अच्छा खिलाड़ी बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। प्रणव हमारा इकलौता बेटा है, जिसके उज्जवल भविष्य के लिए हम दोनों दिन-रात मेहनत करते हैं।� प्रणव अंग्रेजी स्कूल में शिक्षा ले रहा है और खेल के प्रति उसकी लगन को देखते हुए हम सभी उसका हौसला बढ़ाते रहते हैं। हमें उम्मीद है कि वह आगे चलकर देश का नाम रोशन करेगा।खुद को कर दिखाया साबितप्रणव के कोच मोबीन शेख ने बताया कि प्रणव की रिकॉर्ड तोड़ पारी से वे बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि प्रणव के खेल को देखते हुए हमें उससे काफी उम्मीदें थीं और उसने अपनी अथक मेहनत से खुद को साबित भी कर दिखाया है। प्रणव के रिकॉर्ड से हम बेहद खुश हैं। एक न एक दिन वह एक बड़ा खिलाड़ी जरूर बनेगा। मोबीन ने कहा कि प्रणव को हम पिछले पांच वर्षों से क्रिकेट की ट्रेनिंग दे रहे हैं। करीब 12 साल की उम्र से प्रणव क्रिकेट के गुर सीखने के लिए गंभीर हो गया था। शुरुआती दौर में तो वह कुछ खास नहीं कर पा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उसकी परफॉर्मेंस में काफी सुधार होने लगा और आज वह देश भर में जाना जा रहा है।6 साल की उम्र थाम लिया बल्लाप्रणव धनावड़े ने क्रिकेट की दुनिया में कुछ अलग करने के मकसद से 6 साल की उम्र से ही बल्ला थाम लिया था। वे आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं तो उन्हें अपने पुराने दिन याद आ रहे हैं। वे कहते हैं कि बचपन से ही मैं सचिन तेंदुलकर की तरह एक बड़ा और सफल बल्लेबाज बनना चाहता था।माता-पिता को दिया श्रेयप्रणव धनावड़े ने सफलता का श्रेय माता-पिता और� कोचों को� दिया है।� प्रणव ने कहा कि वह हमेशा ही अच्छा खेलने की कोशिश करते हैं। इस बार भी वह अच्छा खेलने के मन से उतरे थे। चौथे शतक के बाद उन्होंने पृथ्वी शाह के रिकॉर्ड को तोडऩे का मन बनाया और तोड़ा भी।� खेल खत्म होने के बाद घर जाकर वह आराम से सो गए।� सुबह फिर खेलने के लिए मैदान पर आ गए और इतिहास रच दिया।� प्रणव देश के मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बहुत बडे़ फैन है।प्रणव को एमसीए देगा स्कॉलरशिपस्कू ली क्रिकेट टूर्नामेंट में 1009 रन की रिकॉर्ड पारी खेलने वाले प्रणव धनावड़े को मुम्बई क्रिकेट एसोसिएशन ने पांच साल तक स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है। इसके तहत प्रणव को क्रिकेट संघ प्रति माह दस हजार रुपए देगा। एमसीए प्रणव को 2016 से 2021 तक यह सुविधा उपलब्ध कराएगा। गौरतलब है कि गांधी के.सी. गांधी हायर स्कूल की तरफ से खेलते हुए 15 वर्षीय प्रणव ने मंगलवार को भंडारी कप अंतर विद्यालयी टूर्नामेंट में 1009 रन का व्यक्तिगत स्कोर खड़ा कर इतिहास रच दिया था।� उन्होंने केवल 323 गेंदों में यह कारनामा किया। वे पहले एेसे क्रिकेटर हैं जिन्होंने अकेले ही हजार से अधिक रन बना डाले।

News Posted on: 07-01-2016
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